हरिद्वार में महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी को लेकर दिनभर चला हाई वोल्टेज ड्रामा, नरसिंहानंद गिरी अपने साथ ले गए
हरिद्वार: धार्मिक नगरी हरिद्वार मंगलवार को एक हाई वोल्टेज घटनाक्रम का गवाह बनी, जब महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी को लेकर दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी अपने शिष्यों और समर्थकों के साथ महंत रामस्वरूपानंद गिरी की तलाश में दिनभर अलग-अलग स्थानों पर भटकते रहे। देर शाम जाकर उन्हें मंगलौर थाना क्षेत्र की लखनौता चौकी में पाया गया, जिसके बाद यति नरसिंहानंद गिरी उन्हें अपने साथ लेकर रवाना हो गए। यह पूरा प्रकरण एक गंभीर मंदिर विवाद से जुड़ा है, जिसमें महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी न्याय की मांग कर रहे हैं।
पदयात्रा की घोषणा और महंत का लापता होना
दरअसल, महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी ने पहले घोषणा की थी कि वे हरिद्वार के स्वामी सर्वानंद घाट से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के देहरादून स्थित आवास तक पदयात्रा निकालेंगे। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य मंदिर विवाद में न्याय की मांग करना था। अपनी घोषणा के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब दो बजे यति नरसिंहानंद गिरी अपने समर्थकों और बड़ी संख्या में यति शिष्यों के साथ सर्वानंद घाट पहुंचे। हालांकि, वहां महंत रामस्वरूपानंद गिरी नहीं मिले। बताया गया कि उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था, जिसके बाद उनके समर्थकों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। यह एक तरह से अचानक लापता होने जैसा मामला था, जिसने सभी को चिंतित कर दिया और क्षेत्र में सनसनी फैला दी।
घंटों की तलाश के बाद चौकी में मिले महंत
करीब तीन घंटे तक विभिन्न स्थानों पर गहन खोजबीन के बाद, शाम लगभग पांच बजे महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी को मंगलौर थाना क्षेत्र की लखनौता चौकी में पाया गया। सूचना मिलने पर यति नरसिंहानंद गिरी, महामंडलेश्वर यति प्रत्यंग्या गिरी और उनके साथ मौजूद यति शिष्य तुरंत वहां पहुंचे। बाद में यति नरसिंहानंद गिरी और उनके शिष्यों ने महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी को अपने साथ लेकर वहां से प्रस्थान किया, जिससे दिनभर चला हाई वोल्टेज ड्रामा समाप्त हुआ। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।
दो वर्षों से मंदिर में सेवा करने का दावा
महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी ने बताया कि वे पिछले लगभग दो वर्षों से ग्राम दहियाकी स्थित शिव मंदिर में रहकर भगवान शिव की सेवा कर रहे थे। उन्होंने अपनी सेवा अवधि के दौरान मंदिर में कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक कार्य करने का दावा किया। उनके अनुसार:
- उन्होंने मंदिर में नियमित रूप से आरती, महायज्ञ और भंडारे का आयोजन कराया।
- उन्होंने मंदिर में नर्मदेश्वर महादेव की स्थापना की।
- दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा कराई।
- मंदिर परिसर में शौचालय का निर्माण भी कराया।
- प्रत्येक एकादशी को स्थानीय महिलाएं मंदिर में भजन-कीर्तन करती हैं।
ये सभी कार्य उनके मंदिर के प्रति समर्पण और आस्था को दर्शाते हैं।
27 जुलाई की घटना और गंभीर आरोप
महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी ने 27 जुलाई 2026 की रात एक गंभीर घटना का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रात करीब नौ बजे गांव के कई लोग मंदिर परिसर में पहुंचे और उनके साथ अभद्रता की। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने उन्हें मंदिर छोड़ने की धमकी दी, मंदिर की धार्मिक सामग्री के साथ तोड़फोड़ की और उनसे जबरन कुछ कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक लाख रुपये देकर मंदिर खाली करने के लिए कहा गया था, जिसे अगले ही दिन वापस ले लिया गया। इस डराने-धमकाने और मारपीट की घटना के बाद भय के कारण उन्हें मंदिर छोड़ना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उसी रात उनके समर्थकों के साथ भी मारपीट की गई और उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने महंत का समर्थन किया तो उन्हें गांव से बाहर निकाल दिया जाएगा। यह पूरी घटना धार्मिक स्थल पर अराजकता और हिंसा को उजागर करती है।
विधायक पर लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी ने मंगलौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक काजी निजामुद्दीन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि विधायक के समर्थकों के इशारे पर यह सब हुआ और यहां तक कि मंदिर के धूने को भी नुकसान पहुंचाया गया। ये आरोप बेहद संगीन हैं और यदि सच साबित होते हैं तो धार्मिक स्थलों पर होने वाली ऐसी घटनाओं पर गंभीर सवाल उठाते हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
पुलिस को पहले भी दी थी शिकायत, अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी का कहना है कि उन्होंने 29 जुलाई को थाना मंगलौर में इस घटना की लिखित शिकायत दी थी। इसके अलावा, पूर्व में भी उन्होंने थाना मंगलौर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को कई बार शिकायतें दी थीं, लेकिन उनका आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराकर दोबारा मंदिर में स्थापित नहीं किया गया, तो वे देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। यह मामला अब एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
