वन्दे मातरम केवल शब्दों का संयोजन ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा की आवाज : सतपाल महाराज

हरिद्वार में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर भव्य समारोह, मंत्री सतपाल महाराज ने कहा – ‘यह आजादी की आत्मा है’

हरिद्वार में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर गुरुवार को एक ऐतिहासिक समारोह का आयोजन किया गया। ऋषिकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने दीप प्रज्जवलित कर उत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया।

राष्ट्रीय गीत का ऐतिहासिक महत्व

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने अपने संबोधन में बताया कि 7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारत की स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख प्रेरणा स्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज है” जिसने आजादी की लड़ाई में पूरे राष्ट्र को एकसूत्र में पिरोने का काम किया।

महाराज ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इस गौरवशाली उत्सव को एक वर्ष तक राष्ट्रव्यापी स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है। यह पहल राष्ट्रीय एकता और गौरव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम की भूमिका

सतपाल महाराज ने भावुक होते हुए याद किया कि कैसे बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान क्रांतिकारियों ने इस गीत को अपनी प्रेरणा बनाया। उन्होंने बताया कि आजादी के दीवानों ने इसी गीत को गाते हुए फांसी के फंदे को गले लगाया था।

ब्रिटिश सरकार ने इसके व्यापक प्रभाव से भयभीत होकर इस गीत पर प्रतिबंध भी लगाया था, जो इसकी शक्ति का प्रमाण है। मंत्री ने इसे स्वदेशी आंदोलन का सर्वोच्च नारा बताया।

समारोह में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक आदेश चौहान, राज्यमंत्री सुनील सैनी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

समारोह के दौरान उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन किया और दिल्ली से प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण देखा। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति और आत्मगौरव के उत्सव के रूप में संपन्न हुआ।

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