सददाम हुसैन।
हतिद्वार।देहरादून/जालंधर।
वरिष्ठ सिविल जज रहे स्वर्गीय नरेन्द्र सिंह भल्ला की कीमती भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा फर्जी बैनामों के जरिए कब्ज़ा करने का गंभीर मामला सामने आया है। जालंधर निवासी बरजिन्दर भल्ला ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री उत्तराखंड को विस्तृत शिकायती प्रार्थनापत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि उनके पिता और दादा की वैध रूप से खरीदी गई ज़मीन को भूमाफियाओं ने फर्जी व्यक्तियों को खड़ा कर धोखे से बिक्री दिखाकर निर्माण कर लिया और यहां तक कि टावर भी लगा दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जालंधर के निवासी बरजिन्दर भल्ला (आधार नंबर 4740 8280 0411) ने आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक भूमि मौजा अम्बूवाला तल्ला, परगना परवादून, तहसील व जिला देहरादून में स्थित है। इस भूमि का विवरण खाता संख्या 331 के तहत ख.नं. 988 रकबा 0.0320 हेक्टेयर एवं ख.नं. 999 रकबा 0.1050 हेक्टेयर, कुल 0.1370 हेक्टेयर है। यह ज़मीन उनके दादा, स्वर्गीय नरेन्द्र सिंह भल्ला — जो जालंधर में वरिष्ठ सिविल जज रहे — ने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी थी। उनके निधन के बाद यह भूमि उनके पुत्र हरिन्दर भल्ला के नाम विरासत में दर्ज है।
बरजिन्दर भल्ला बताते हैं कि उनके पिता हरिन्दर भल्ला (आधार नंबर 2600 6155 7893) वृद्धावस्था में हैं। इसलिए उन्होंने जमीन की देखरेख का अधिकार अपने पुत्र बरजिन्दर भल्ला को मुख्तारनामा के माध्यम से दिया। इसी आधार पर बरजिन्दर जब मौके पर पहुंचे, तो चौकाने वाली स्थिति सामने आई।
पीड़ित के अनुसार, विपक्षी सौरभ मित्तल निवासी एमआईजी ए-27, एमडीडीए कॉलोनी, डालनवाला, देहरादून ने कथित रूप से फर्जी व्यक्तियों को खड़ा कर नकली बैनामे कराए और इसी आधार पर उक्त भूमि पर मकान बनवा लिया। यही नहीं, कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे मकान खड़े कर लिए हैं तथा जमीन के एक हिस्से पर टावर भी लगा दिया गया है।

पीड़ित का आरोप है कि
“यह जमीन मेरे दादा, वरिष्ठ सिविल जज रहे नरेन्द्र सिंह भल्ला की ईमानदारी की कमाई से खरीदी गई थी। आज कुछ लोगों ने मिलकर फर्जी तरीके से इसे कब्जा कर लिया है। यह सिर्फ जमीन कब्जाने का मामला नहीं, बल्कि कानून व न्याय प्रणाली पर कुठाराघात है।”
प्रार्थी का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में भूमि आज भी उनके परिवार के नाम दर्ज है, इसके बावजूद फर्जी दस्तावेज तैयार कर यह बड़ा खेल किया गया है। उन्होंने इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत की भी आशंका जताई है।

पीड़ित ने अपने प्रार्थनापत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि उच्चस्तरीय जांच हो तो पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो जाएगा, क्योंकि न तो परिवार ने जमीन बेची है, न ही किसी को अधिकृत किया है।
उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री उत्तराखंड को आदेशित किया जाए कि वह स्वयं या नामित अधिकारी को मौके पर भेजकर सही तथ्य जानें और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बरजिन्दर भल्ला ने अपने पत्र को “न्याय की अंतिम उम्मीद” बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री न्याय दिलाते हैं, तभी उनके परिवार की वर्षों पुरानी संपत्ति को बचाया जा सकेगा।

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