हरिद्वार के विकास भवन में CDO का ‘सीक्रेट’ दौरा: शौचालयों की गंदगी देख भड़के डॉ. ललित नारायण मिश्र, दिया कड़ा अल्टीमेटम!

हरिद्वार। विकास भवन परिसर में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने शुक्रवार को विकास भवन स्थित शौचालयों का औचक निरीक्षण किया। इस आकस्मिक दौरे में उन्होंने शौचालयों की साफ-सफाई, पेयजल उपलब्धता, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता मानकों और अन्य आवश्यक सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। डॉ. मिश्र ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश दिए।

सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने जोर देकर कहा कि विकास भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आमजन अपने विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर की स्वच्छता और साफ-सफाई बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छ वातावरण न केवल आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराता है, बल्कि कर्मचारियों के लिए भी एक स्वस्थ कार्यस्थल सुनिश्चित करता है। यह सरकारी कार्यालयों की छवि के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शौचालयों की नियमित सफाई और कड़ी निगरानी के निर्देश

डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए तथा कहीं भी गंदगी, दुर्गंध या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। उन्होंने कहा कि सफाई कार्य निर्धारित समय के अनुसार हो और इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी समय आने वाले लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े। यह हरिद्वार के विकास भवन की पहचान का सवाल है।

उच्च न्यायालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य

मुख्य विकास अधिकारी ने विशेष रूप से माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्वच्छता एवं साफ-सफाई के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका शत-प्रतिशत पालन किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी आवश्यक मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है। यह सरकारी स्वच्छता नियमों का पालन दर्शाता है।

लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई: CDO की सीधी चेतावनी

डॉ. मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वच्छता व्यवस्था के प्रति किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता क्षम्य नहीं होगी। यदि भविष्य में किसी भी निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास भवन जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता का उच्च स्तर बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से नियमित निरीक्षण करने, सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की निगरानी रखने तथा आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

स्वच्छता: एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया, केवल अभियान नहीं

निरीक्षण के अंत में मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने सभी अधिकारी और कर्मचारियों से अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने का आग्रह किया ताकि विकास भवन परिसर हमेशा साफ, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का उदाहरण बन सके। हरिद्वार के विकास भवन को एक आदर्श कार्यस्थल बनाना ही उनका लक्ष्य है।

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