हरिद्वार। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी `विकसित भारत-जी राम जी` योजना के साथ विभिन्न विभागीय परियोजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) के संबंध में विकास भवन सभागार रोशनाबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। `मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र` की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समग्र और एकीकृत रणनीति तैयार करना था।

  • मुख्य बिंदु:
  • `विकसित भारत-जी राम जी` योजना के तहत गांवों का सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य।
  • जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन पर विशेष फोकस।
  • विभिन्न विभागों की योजनाओं को एकीकृत कर प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश।

योजना का उद्देश्य और प्राथमिकताएं

बैठक में `मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र` ने `विकसित भारत-जी राम जी` योजना के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत जल सुरक्षा एवं संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम से निपटने वाले कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। `डॉ. मिश्र` ने उपस्थित सभी विभागों के अधिकारियों को अपनी अधिक से अधिक योजनाओं को इस वृहद परियोजना के साथ सफलतापूर्वक जोड़कर प्रभावी ढंग से संचालित करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

आय संवर्धन हेतु विशिष्ट निर्देश

ग्रामीणों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए `मुख्य विकास अधिकारी` ने विभिन्न विभागों को विशिष्ट कार्ययोजनाएं बनाने को कहा। उन्होंने `सिंचाई` और `लघु सिंचाई विभाग` को प्रत्येक गांव में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, `भेषज विभाग` और `जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान` को `चंदन` व `आंवला` पौधरोपण, `उद्यान विभाग` को `ड्रैगन फ्रूट`, `स्ट्रॉबेरी` और `मशरूम उत्पादन`, `रेशम विभाग` को `शहतूत पौधरोपण` तथा `मत्स्य विभाग` को `मत्स्य पालन` को बढ़ावा देने के लिए कार्य करने के निर्देश दिए गए।

आत्मनिर्भर ग्राम मॉडल पर जोर

`डॉ. ललित नारायण मिश्र` ने सभी `विकासखंडों` को `Self Sustainable Village Model` (आत्मनिर्भर ग्राम मॉडल) के तहत ऐसे गांवों को विकसित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, जहाँ स्थानीय स्तर पर आय के स्थायी स्रोत तैयार हो सकें। इस मॉडल के अंतर्गत `जल संचय`, `जल निकासी`, `सिंचाई सुविधाओं का विकास`, `नर्सरी निर्माण` तथा `स्वयं सहायता समूहों` के माध्यम से `कूड़ा एवं अपशिष्ट प्रबंधन` जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। बैठक में `जिला विकास अधिकारी`, सभी `खंड विकास अधिकारी` समेत `कृषि`, `उद्यान`, `रेशम`, `मत्स्य`, `पंचायतीराज`, `सिंचाई`, `लघु सिंचाई`, `पशुपालन`, `डेयरी`, `स्वजल`, `बाल विकास`, `भेषज` तथा `जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान` के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्हें योजनाओं में बेहतर समन्वय स्थापित कर गांवों को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

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