देहरादून के राजभवन सभागार में उत्तराखंड की सुरक्षा, पर्यावरणीय चुनौतियों और पर्यटन की संभावनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर एक ‘विमर्श’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और अपने विचार प्रस्तुत किए।

राज्यपाल का संबोधन: संकल्प और कर्तव्य

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उत्तराखंड में द्वितीय पंक्ति के सुरक्षा प्रहरी के रूप में सेवा करेंगे। उन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए देवभूमि के प्राचीन संतों जैसा आचरण करने और पर्यटन के विकास के लिए ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को अपनाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने विशेषकर युवाओं और पूर्व सैनिकों से इस संकल्प को दृढ़ निश्चय के साथ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश के शीर्ष नेतृत्व ने आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत बनाने की दिशा में मजबूत और निर्णायक कदम उठाए हैं।

राज्यपाल ने उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए पांच क्रांतियों की आवश्यकता पर बल दिया:

  • हनी क्रांति
  • एरोमा क्रांति
  • मिलेट क्रांति
  • स्वयं सहायता समूह क्रांति
  • होमस्टे क्रांति

सुरक्षा चुनौतियां: बाहरी और आंतरिक खतरे

लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. सिंह ने सुरक्षा क्रियान्वयन पर अपने विचार रखते हुए कहा कि चीन-पाक गठजोड़, बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियां, सीमा पर तस्करी, साइबर हमले और नकारात्मक सोशल मीडिया देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। उन्होंने इन खतरों से निपटने के लिए भारतीय नागरिकों को प्रशिक्षित, शिक्षित और जागरूक रहने तथा देश के प्रति निष्ठा और समर्पण का भाव रखने की अपील की।

पर्यावरण संकट और मैती आंदोलन

मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने पर्यावरण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे अंग्रेजों ने कोयले के लिए बांझ के पेड़ों को काटा और उनकी जगह औद्योगिक जरूरतों के लिए चीड़ के पेड़ लगाए। आज चीड़ के पेड़ 27% से अधिक क्षेत्र में फैल गए हैं, जबकि बांझ केवल 14% रह गए हैं। इसके कारण पहाड़ों में जल स्रोत सूख रहे हैं, जंगल में नमी कम हो गई है, और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने चीड़ को जंगल की आग का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि इससे ब्लैक कार्बन बढ़ रहा है, जो ग्लेशियरों के पिघलने का कारण है। उन्होंने चीड़ के पेड़ों को इस शर्त पर काटने की अनुमति देने की सिफारिश की कि उनके स्थान पर बांझ, बरगद, और पीपल जैसे पेड़ लगाए जाएं।

उत्तराखंड में पर्यटन की संभावनाएं

कमांडर दीपक खंडूरी ने उत्तराखंड में पर्यटन के विविध आयामों पर एक प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में ग्रामीण पर्यटन, इको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म और साहसिक पर्यटन जैसी कई संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अधिकांश पर्यटक नैनीताल, मसूरी, और हरिद्वार जैसे कुछ ही स्थानों पर केंद्रित हो रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने पर्यटन के विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि राज्य सरकार कनेक्टिविटी में सुधार और नए पर्यटन स्थलों के विकास पर तेजी से काम कर रही है।

कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय पूर्व सैनिक परिषद के अध्यक्ष ले. (रि.) जनरल बी. के. चतुर्वेदी ने किया और समापन संबोधन कर्नल (रि.) अजय कोठियाल द्वारा दिया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एस. एस. नेगी, सी. के. अहलूवालिया, प्रदीप जोशी, कर्नल त्यागी सहित बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त सैनिक अधिकारी और स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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