हरिद्वार जेल में ‘संविधान क्रांति’: कैदियों को सिखाए गए उनके ‘गुप्त’ अधिकार और कर्तव्य!

संविधान दिवस पर हरिद्वार जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

माननीय उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशों पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार द्वारा संविधान दिवस के अवसर पर जिला कारागार, रोशनाबाद, हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य बंदियों को उनके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का आयोजन जिला कारागार प्रशासन के सहयोग से जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार, श्री नरेंद्र दत्त की अध्यक्षता में हुआ, जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

अधिकारियों का सम्मान और बंदियों की भावुक प्रस्तुतियां

वरिष्ठ अधीक्षक जिला कारागार, श्री मनोज आर्य ने मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र दत्त तथा विशिष्ट अतिथियों – मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सिमरनजीत कौर का गर्मजोशी से स्वागत किया। शिविर के दौरान, कारागार में निरुद्ध बंदियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत कव्वाली प्रस्तुत कर सभी उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त, बंदियों ने नशा मुक्ति और संविधान के महत्व पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। विभिन्न विधि विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों से आए विधि छात्रों ने भी नुक्कड़ नाटक, भाषण एवं कला प्रतियोगिता के माध्यम से संवैधानिक अधिकारों व कर्तव्यों पर सार्थक प्रस्तुतियां दीं, जो कानूनी जागरूकता की दिशा में एक बड़ा कदम था।

मुख्य अतिथियों और विधि विशेषज्ञों के प्रेरणादायक उद्बोधन

मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र दत्त ने उपस्थित बंदियों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों को संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई। अपने संबोधन में, उन्होंने भारतीय संविधान को स्वतंत्रता का आधार बताया और कहा कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग—चाहे वह गरीब हो, निर्बल हो या असहाय—के अधिकारों को सुरक्षित करता है। उन्होंने भारत के संविधान को विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान बताते हुए इसकी लचीलता और सशक्तता पर प्रकाश डाला। श्री दत्त ने बल दिया कि यदि हम संवैधानिक प्रावधानों को अपने जीवन में आत्मसात करें, तो भारत शीघ्र ही एक विकसित राष्ट्र बन सकता है।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में संविधान में निहित कर्तव्यों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि कर्तव्यों के पालन के बिना अधिकारों की रक्षा संभव नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री सुधीर कुमार त्यागी ने संविधान की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि संविधान की वजह से ही आज हर नागरिक को सवाल पूछने और अपने अधिकारों की रक्षा का अवसर मिला है, जो न्याय प्रणाली की नींव है।

भागीदारी का सम्मान और न्यायपालिका का आभार

कार्यक्रम के अंत में, मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र दत्त द्वारा प्रतिभाग करने वाले बंदियों एवं विधि छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनकी भागीदारी को प्रोत्साहन मिला। वरिष्ठ अधीक्षक कारागार मनोज आर्य ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका एवं अधिवक्ति जगत ही संविधान के सच्चे संरक्षक हैं, जो कानून के शासन को बनाए रखते हैं। यह शिविर हरिद्वार जेल में बंदियों के बीच कानूनी ज्ञान और अधिकारों की समझ को बढ़ावा देने में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

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