हरिद्वार, 3 फरवरी। हाल ही में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ भरत पंजावनी नामक व्यक्ति ने 29 जनवरी को अपने हाथ में प्लास्टर लगाकर हरिद्वार पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा था कि 27 जनवरी को रोडिबेल पुलिस चौकी हरिद्वार में पुलिस कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और उनका हाथ तोड़ दिया।
हालांकि, इस पूरी कहानी में तब बड़ा मोड़ आया जब 28 जनवरी को भरत पंजावनी नगर कोतवाली के सामने एक दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज में पूरी तरह से सही सलामत चलते-फिरते दिखाई दिए, उनके हाथ में किसी भी प्रकार की कोई चोट नहीं थी। यह फुटेज उनके दावों के बिल्कुल विपरीत है।
ऐसा प्रतीत होता है कि भरत पंजावनी ने सुनियोजित तरीके से पुलिस पर झूठे आरोप लगाए, जिसका उद्देश्य समाज में पुलिस के प्रति नफरत फैलाना, उनकी छवि को खराब करना और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करना था। इसके विपरीत, जानकारी के अनुसार भरत पंजावनी अपने साथियों के साथ मिलकर लगातार आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
भरत पंजावनी का आपराधिक रिकॉर्ड और कानूनी नोटिस
पिछले दो महीनों के भीतर, भरत पंजावनी के खिलाफ शांति भंग के दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, उन पर मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी, वाहन को नुकसान पहुँचाने और चालक से जबरन पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। इस प्रकार, मात्र दो महीने की अवधि में उनके खिलाफ कुल चार मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
भरत पंजावनी द्वारा किए गए इन सभी आपराधिक कृत्यों से संबंधित समस्त साक्ष्य सुरक्षित रूप से उपलब्ध हैं। इन सब के बावजूद, भरत पंजावनी पुलिस के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर समाज में रोष पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
पुलिस पर लगाए गए इन झूठे आरोपों के संबंध में, प्रतिष्ठित एडवोकेट मयंक त्यागी ने भरत पंजावनी को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में उनसे 7 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा गया है। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो हरिद्वार न्यायालय में भरत पंजावनी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
