भारतीय सेना की खड़ग कोर के अंतर्गत रैम डिवीजन ने ‘रैम प्रहार’ नामक युद्धाभ्यास का सफलतापूर्वक आयोजन किया। पश्चिमी कमांड के जीओसी-इन-सी, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने 22 नवंबर 2025 को हरिद्वार में इस अभ्यास का समापन पर निरीक्षण और सत्यापन किया।
यह एक प्रमुख एकीकृत सशस्त्र सेना अभ्यास था, जो भारतीय सेना को आधुनिक, अनुकूलनीय और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभ्यास ने सेना की परिचालन गति, बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं और भूमि, वायु तथा साइबर जैसे सभी क्षेत्रों में वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाया है। मौजूदा संवेदनशील क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, यह अभ्यास हमारी सैन्य तैयारी, प्रतिरोधक क्षमता और रणनीतिक शक्ति को दर्शाता है।
युद्धाभ्यास की मुख्य विशेषताएँ
इस अभ्यास के दौरान, रैम डिवीजन ने विभिन्न युद्ध परिदृश्यों के तहत अपनी तैयारियों को परखा। अभ्यास की कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- कवचित सेना, पैदल सेना, इंजीनियर और आर्मी एविएशन द्वारा गतिशील युद्धक्षेत्र में समन्वित अभियान का संचालन किया गया।
- अत्याधुनिक उपकरणों, खुफिया, निगरानी और जासूसी (ISR) प्रणालियों का प्रभावी एकीकरण देखने को मिला।
- एआई-आधारित निर्णय सहायता प्रणाली और नेटवर्क-सक्षम कमांड और कंट्रोल सिस्टम का उपयोग किया गया, जो भारतीय सेना की तकनीकी श्रेष्ठता को साबित करता है।
- इस अभ्यास ने यह दर्शाया कि भारतीय सेना जटिल और तकनीक-प्रधान युद्धक्षेत्रों में विजय प्राप्त करने की पूरी क्षमता रखती है।
रणनीतिक महत्व और भविष्य की तैयारी
‘रैम प्रहार’ अभ्यास भारतीय सेना की उस अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो उसे समन्वय, नवाचार और लचीलेपन के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाता है। यह अभ्यास भारत की उस मजबूत क्षमता का भी एक शक्तिशाली संकेत है, जिसके बल पर राष्ट्र अपने हितों की रक्षा करने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है।
