हरिद्वार कुंभ 2027: कांवड़ मेले के बाद महाअभियान ने पकड़ी रफ्तार, IIT रुड़की करेगा गुणवत्ता की जांच

हरिद्वार, 5 अगस्त। पवित्र हरिद्वार नगरी में कांवड़ मेला 2026 के सफल और शांतिपूर्ण समापन के साथ ही, अब विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन कुंभ मेला 2027 की तैयारियां पूरी रफ्तार पकड़ने जा रही हैं। मेला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कांवड़ मेले के दौरान प्रभावित हुई सभी अवस्थापना परियोजनाओं पर अब युद्धस्तर पर काम शुरू होगा। इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि प्रत्येक निर्माण कार्य न केवल तय समय-सीमा में पूरा हो, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आईआईटी रुड़की की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

मेलाधिकारी सोनिका ने की व्यापक समीक्षा बैठक

बुधवार को मेलाधिकारी सोनिका ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कुंभ मेला 2027 से संबंधित सभी परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति का जायजा लेना था। उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं को सख्त निर्देश दिए कि कांवड़ मेला समाप्त होते ही वे पूरी क्षमता के साथ निर्माण कार्य पुनः शुरू कर दें। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक परियोजना की नियमित और अनिवार्य थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच भी कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही या कमी की गुंजाइश न रहे। यह कदम श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को सर्वोपरि रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उच्च गुणवत्ता पर विशेष जोर: IIT रुड़की की भूमिका

कुंभ 2027 के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवाजाही को ध्यान में रखते हुए इस बार पांच नए पुलों का निर्माण कराया जा रहा है। इन पुलों की मजबूती और इंजीनियरिंग मानकों को सुनिश्चित करने के लिए इनकी गुणवत्ता का परीक्षण देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी रुड़की से कराया जाएगा। यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण पहल है जो निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और उच्च मानकों को स्थापित करेगी। साथ ही, तकनीकी अधिकारियों को भी विशेष रूप से स्टील स्ट्रक्चर निर्माण कार्यों का वर्कशॉप स्तर पर निरीक्षण कर गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि हरिद्वार की आधारभूत संरचना को भी मजबूती प्रदान करेगी।

अवस्थापना परियोजनाओं को गति देने के निर्देश

बैठक में केवल पुलों पर ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण अवस्थापना परियोजनाओं पर भी तेजी लाने पर जोर दिया गया। इनमें बस अड्डों, पार्किंग स्थलों, प्रमुख चौराहों के सुधार, फुटपाथ, पैदल मार्ग, फसाड लाइटिंग (भवन के अग्रभाग की रोशनी) और पूरे शहर के सौंदर्यीकरण से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी कार्यों का उद्देश्य कुंभ मेला 2027 के दौरान हरिद्वार को एक स्वच्छ, सुंदर और सुविधाजनक तीर्थस्थल के रूप में प्रस्तुत करना है। वर्षा ऋतु समाप्त होते ही, कुंभ शिविरों के लिए चिन्हित भूमि की सफाई और समतलीकरण का कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराया जाएगा, ताकि शिविरों की स्थापना समय पर हो सके।

पौधारोपण और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मेलाधिकारी सोनिका ने सभी नई सड़कों, पुलों और घाटों के किनारों पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण कराने के भी निर्देश दिए। यह पहल न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाएगी बल्कि हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता को भी बढ़ाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। चेतावनी दी गई कि यदि समय पर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो संबंधित कार्यदायी संस्था का भुगतान रोक दिया जाएगा। इसके अलावा, जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित कर इस समस्या का शीघ्र समाधान करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि बारिश के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

कुंभ का महत्व और तैयारियों की विशालता

कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का एक अद्वितीय संगम है, जो हर 12 साल में आयोजित होता है। हरिद्वार में होने वाला कुंभ विशेष महत्व रखता है, जहां लाखों श्रद्धालु गंगा में पवित्र डुबकी लगाने आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से व्यवस्थाओं को सुचारू रखना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। यही कारण है कि मेला प्रशासन तैयारियों को लेकर कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता। सड़क, पुल, आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का यह महाअभियान हरिद्वार को न केवल कुंभ के लिए तैयार करेगा, बल्कि शहर के दीर्घकालिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा। प्रत्येक विभाग को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस राष्ट्रीय महत्व के आयोजन को सफल बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना होगा।

बैठक में उपस्थित अधिकारी

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, वित्त नियंत्रक लखेन्द्र गौंथियाल, तकनीकी सेल के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने विभागों से संबंधित तैयारियों की जानकारी दी और मेलाधिकारी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

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