हरिद्वार से निकला 2036 ओलंपिक का ‘महा-मंत्र’: भारत की मेजबानी का सपना, संतों ने दिया आशीर्वाद!
हरिद्वार, देवभूमि उत्तराखंड। क्या भारत 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी करेगा? यह सवाल अब सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है, जिसे अब संत समाज का भी आशीर्वाद मिल गया है। “2036 ओलंपिक संकल्प कांवड़ यात्रा” ने गुरुवार को हरिद्वार में आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की, जो भारत को वैश्विक खेल मंच पर स्थापित करने का एक बड़ा कदम है।
ओलंपिक संकल्प यात्रा को संतों का दिव्य आशीर्वाद
भारत को वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी दिलाने के भव्य उद्देश्य से शुरू की गई “2036 ओलंपिक संकल्प कांवड़ यात्रा” को हरिद्वार में संतों ने अपनी शुभकामनाएँ और आशीर्वाद प्रदान किया। प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने विशेष रूप से श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान, संत समाज ने भारत के इस महत्वाकांक्षी ओलंपिक मेजबानी के सपने की सफलता के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
आस्था और राष्ट्र गौरव का संगम: कांवड़ यात्रा का अनूठा उद्देश्य
आगामी 10 अगस्त को यह महत्वपूर्ण कांवड़ यात्रा हरिद्वार की पवित्र हर की पैड़ी से गंगाजल लेकर ऋषिकेश स्थित वीरभद्र महादेव मंदिर तक निकाली जाएगी। इस यात्रा का उद्देश्य मात्र धार्मिक परंपरा का निर्वहन करना नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में एक शक्तिशाली संदेश प्रसारित करेगी कि भारत वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस अनूठी पहल के माध्यम से खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, राष्ट्र गौरव को सशक्त करना और देश की युवा शक्ति को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना मुख्य लक्ष्य है।
140 करोड़ भारतीयों का सपना: खेल शक्ति का प्रदर्शन
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने इस यात्रा को आस्था और राष्ट्र निर्माण का एक अद्भुत संगम बताया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों का यह गहरा सपना है कि वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी देश को मिले। इससे दुनिया को भारत की अद्भुत खेल क्षमता, समृद्ध संस्कृति और अद्वितीय संगठन शक्ति को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। रेखा आर्या ने यह भी जोड़ा कि देवभूमि उत्तराखंड से शुरू होने वाला यह संकल्प देश के सभी खिलाड़ियों, युवाओं और खेल प्रेमियों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
जनआंदोलन का रूप लेता ओलंपिक संकल्प
रेखा आर्या ने आगे कहा कि जब धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रहित और खेल संस्कृति के विकास का संकल्प जुड़ता है, तो वह केवल एक आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले लेता है। इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य युवाओं में खेलों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा देना है, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकें।
भोलेनाथ और संत समाज का आशीर्वाद: सपने का सच होना तय!
रेखा आर्या ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि भगवान भोलेनाथ की कृपा और संत समाज के दिव्य आशीर्वाद से भारत का वर्ष 2036 में ओलंपिक मेजबानी का सपना निश्चित रूप से साकार होगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान देश की एकता, खेल भावना और राष्ट्रीय गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर, संत समाज ने भी भारत को वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलने की कामना करते हुए रेखा आर्या के अथक प्रयासों की जमकर सराहना की। संतों ने उन्हें “विजयी भव, संकल्प सिद्धिरस्तु” का शक्तिशाली आशीर्वचन देते हुए कहा कि राष्ट्रहित, लोककल्याण और युवा शक्ति के उत्थान के लिए किया गया प्रत्येक संकल्प ईश्वर की कृपा से अवश्य पूर्ण होता है।


