सददाम हुसैन – सम्पादक।
हरिद्वार। लोक भवन देहरादून अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हरिद्वार में आयोजित भव्य समारोह में आज राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में उपस्थित हजारों साधकों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि गायत्री परिवार और देव संस्कृति विश्वविद्यालय की भूमिका केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थान आधुनिक युग का जीवंत गुरुकुल हैं, जहाँ शिक्षा, साधना और सेवा—तीनों का समन्वय दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार की तपोभूमि और माँ गंगा की पावन गोद सदैव संकल्प, साधना और लोककल्याण की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि गायत्री परिवार की ऊर्जा और आध्यात्मिक प्रभाव आज विश्वभर में मानवीय मूल्यों का संदेश पहुँचा रहे हैं। राज्यपाल ने डॉ. चिन्मय पंड्या के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे अध्यात्म और आधुनिक विज्ञान के संगम से समाज को नई दिशा प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं।

अखंड ज्योति राष्ट्र की एकता का प्रतीक—राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि अखंड ज्योति मात्र एक लौ नहीं, बल्कि अखंड भारत की भावना और धर्म-जागरण की चेतना का प्रतीक है। इसकी ज्योति सदैव सत्य, नैतिकता और एकता की ओर ले जाने का संदेश देती है। उन्होंने “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” के मंत्र को समाज परिवर्तन का अद्भुत सूत्र बताते हुए कहा कि यह केवल नारा नहीं बल्कि मानव-मन को भीतर से जागृत करने वाला संदेश है।

उन्होंने आगे कहा कि गायत्री परिवार की सेवा-केन्द्रित कार्यप्रणाली उत्तराखण्ड और पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल है। स्वच्छता, सेवा, संस्कार और नैतिक उन्नयन के जिन मूल्यों को गायत्री परिवार ने जनमानस में स्थापित किया है, वह राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राज्यपाल ने सभी स्वयंसेवकों की निष्ठा, अनुशासन और समर्पण की विशेष सराहना की।

सनातन गुरु परंपरा भारतीय संस्कृति की धुरी—शंकराचार्य

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा—
“गुरु कुम्हार है और शिष्य कुंभ। गुरु बाहर से थपकी और भीतर से सहारा देकर जीवन को आकार देता है।”
उन्होंने कहा कि माता-पिता, गुरु और ईश्वर—ये तीनों सनातन संस्कृति के स्तंभ हैं और भारतीय समाज इन्हीं से शक्ति ग्रहण करता है।

नारी-जागरण और आत्मबल का संदेश—डॉ. चिन्मय पंड्या

शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह शताब्दी वर्ष विश्व समुदाय के लिए सौभाग्य की त्रिवेणी है। उन्होंने कहा कि वंदनीया माताजी मातृशक्ति की प्रेरणा थीं, जिन्होंने नारी को समाज और परिवार की आधारशिला के रूप में स्थापित किया। उन्होंने नारी-जागरण, नारी-स्वाभिमान और संस्कारयुक्त समाज निर्माण के लिए असाधारण योगदान दिया।

डॉ. चिन्मय ने कहा कि गायत्री परिवार का संकल्प विश्वशांति, मानव-एकता और युग-निर्माण के सिद्धांतों को आगे बढ़ाना है। आज का यह शताब्दी आयोजन उसी दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर है।

अनेक गणमान्य हुए शामिल

समारोह में विधायक मदन कौशिक, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री श्री शिव प्रकाश, सहित कई प्रमुख सामाजिक एवं आध्यात्मिक हस्तियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में डीएम मयूर दीक्षित, एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल, व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि, आदित्य कोठारी, शिक्षाविद, जिला प्रशासन के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार गण भी उपस्थित रहे।

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