विश्व हिंदी दिवस पर बीएचईएल में प्रभागीय काव्य गोष्ठी का आयोजन

दिनांक 10 जनवरी को, विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में, बीएचईएल, हरिद्वार की राजभाषा कार्यान्वयन समिति ने नए अभियांत्रिकी भवन सभागार में एक भव्य प्रभागीय काव्य गोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस गरिमामयी कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (फाउंड्री एवं फोर्ज टेक्नोलॉजी) डॉ. अरानी नागा सुधाकर एवं विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कविगण डॉ. शिव शंकर जायसवाल तथा भूदत्त शर्मा द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित करके किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सुधाकर ने साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में साहित्य ही वह माध्यम है जो समाज को संवेदनशीलता से जोड़े रखता है। उन्होंने इतने सारे कवियों का एक मंच पर एकत्र होना हिंदी साहित्य की समृद्धि का परिचायक बताया। विशिष्ट कवियों में, डॉ. शिव शंकर जायसवाल ने अपनी भावपूर्ण रचना ‘’हे परम हंस के दिव्य पूत, हे नव भारत के अग्रदूत’’ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, वहीं श्री भूदत्त शर्मा ने अपनी ओजस्वी रचना ‘’पांव धरती पर धरो, धीर भी धरना सखे’’ के माध्यम से सभी को अविभूत कर दिया।

इस काव्य गोष्ठी में प्रभाग के कुल 31 कवियों ने अपनी मौलिक रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया। इनमें प्रमुख नाम देवेंद्र मिश्रा, मंजुला भगत, शशि रंजन समदर्शी और महेंद्र कुमार माही शामिल रहे। प्रभारी (राजभाषा) श्री हरीश सिंह बगवार ने सभी उपस्थित अतिथियों और रचनाकारों का हार्दिक स्वागत करते हुए विश्व हिंदी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के समापन समारोह में, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्री संतोष कुमार गुप्ता ने सभी सहभागी कवियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही, उन्होंने हिंदी ई-मेल प्रोत्साहन योजना के विजेताओं को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए। श्री गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने हिंदी भाषा को जीवंत और ऊर्जावान बनाए रखने में कवियों के अतुलनीय योगदान की सराहना की।

इस महत्त्वपूर्ण अवसर पर अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) पार्थ सारथी गौड़ सहित राजभाषा विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य श्रोतागण उपस्थित रहे। पूरी गोष्ठी का संचालन कवि सोनेश्वर कुमार सोना ने अपनी चिरपरिचित और आकर्षक शैली में सफलतापूर्वक किया, जिससे कार्यक्रम में चार चाँद लग गए।

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