फर्जी प्रमाण पत्र बनाने पर सीएससी संचालक के खिलाफ प्राथमिकी की सिफारिश
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में, हरिद्वार जिला प्रशासन फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर, उप जिलाधिकारी हरिद्वार जितेंद्र कुमार ने बताया कि तहसीलदार की जांच में सीएससी संचालक साजिद के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, जो मुस्तफाबाद, पोस्ट धनपुरा, तहसील हरिद्वार का निवासी है।
जांच के मुख्य निष्कर्ष
तहसीलदार सचिन कुमार द्वारा की गई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- सीएससी संचालक साजिद (सीएससी आईडी–354772620014) ने आवेदक नवाजिश, पुत्र नूर आलम, निवासी मुस्तफाबाद को एक फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करवाया।
- आवेदन के साथ संलग्न खतौनी (भूमि का दस्तावेज़) कूटरचित यानी नकली पाया गया।
- फर्जी खतौनी में जमीन के मालिक के रूप में मुस्तकीम पुत्र सद्दीक का नाम दिखाया गया था, जबकि आधिकारिक भूलेख अभिलेखों में उसी भूमि पर अब्दुल मजीद पुत्र अल्लादीन का नाम दर्ज है।
- इससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सीएससी पोर्टल का दुरुपयोग किया गया था।
संगठित धोखाधड़ी और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग
प्रशासनिक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि साजिद और उसके सहयोगी संगठित रूप से सरकारी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर रहे थे। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों का अनुचित लाभ उठाना था। इस तरह की गतिविधियों से न केवल राज्य सरकार की योजनाओं की पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
प्रशासन की आगामी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए, उप जिलाधिकारी हरिद्वार ने साजिद और अन्य सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की संस्तुति की है। इसके अलावा, जिलाधिकारी के निर्देशानुसार निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए सभी प्रमाण पत्रों की व्यापक जांच की जाएगी।
- भविष्य में जारी होने वाले प्रत्येक प्रमाण पत्र की गहनता से जांच सुनिश्चित की जाएगी।
- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र बनाने वाले किसी भी सीएससी संचालक के खिलाफ कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
