महंत सुधीर गिरी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग
महानिर्वाणी पंचायती अखाड़ा के महंत सुधीर गिरी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग कई संतों द्वारा उठाई गई है। संतों का आरोप है कि पुलिस जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया, जिसके कारण असली दोषी अभी भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने भारत के गृहमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
संत समुदाय में बढ़ता अविश्वास
यह मांग उस समय और तेज हो गई जब हाल ही में नैनीताल हाईकोर्ट ने पंचायती श्री उदासीन बड़ा अखाड़ा के कोठारी महंत मोहन दास महाराज के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए। इसी को आधार बनाते हुए संतों ने महंत सुधीर गिरि महाराज हत्याकांड के पीछे छिपे प्रभावशाली चेहरों को बेनकाब करने के लिए सीबीआई जांच की मांग की है। इस मांग ने अखाड़े की आंतरिक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
जांच पर राजनीतिक प्रभाव का आरोप
माना जाता है कि इस हत्याकांड की शुरुआती जांच कर रहे दो ईमानदार पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था, क्योंकि वे असली दोषियों के करीब पहुंच चुके थे। आरोप है कि दोषियों ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित किया। संतों का मानना है कि सीबीआई जांच से कई बड़े और प्रभावशाली लोग बेनकाब हो सकते हैं।
हत्याकांड का विवरण
14 अप्रैल 2012 की रात को, जब महंत सुधीर गिरी हरिद्वार से रुड़की के पास बेलड़ी गांव के चौक से गुजर रहे थे, तब बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे संत समाज को झकझोर दिया था। हालांकि एडीजे प्रथम कोर्ट ने कुछ आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन संतों का कहना है कि असली अपराधी अभी भी आजाद हैं।
जांच की मांग करने वाले प्रमुख संत
- दिगंबर संत गोपाल गिरी
- वासुदेव गिरी
- संत राघव दास
